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Nepal Ke Lachivi-Nepal Sae Prapat Abhilekh Ka Adhayaan

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Rs. 70.00
ISBN:
8170990777
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About the Book

नेपाल की काठमांडू उपत्यका में ईसा की चैथी शताब्दी के मध्य से आठवीं शताब्दी तक लिच्छवि राजाओं का एक सुप्रतिष्ठित राजवंश के रूप में शासन अभिजेखिक साक्ष्य के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है। साहित्यिक एवं पुरातात्विक साक्ष्यों से भी इसकी पुष्टि होती है। ात लिच्छवि काल के लगभग एक सौ नब्बे अभिलेखों के प्रकाश्न के बाद उस काल के राजनीतिक, प्रशासनिक, आर्थिक एवं धार्मिक इतिहास पर एक क्रमबद्ध इतिहास लिखने की आवश्यका को ध्यान में रखते हुए इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वर्तमान प्रयास किया गया है। प्रस्तुुत पुस्तक में लिच्छतियों की उत्पत्ति, नेपाल से उनके सम्बन्ध तथा लिच्छवि संवत्सरों के विषय में चर्चा करते हुए उनके प्राराम्भिक इतिहास, मानदेव के शासन में राजशवित की पराकाष्टा, श्विदेव अंशुवर्मा काल के राजनीतिक सम्बन्धों, गुप्त नामधारी सामन्तों एवं नरेशों तथा नरेन्द्रदेव एवं परवर्ती लिच्छवि शासकों के राजनीतिक शक्ति सन्तुलन तथा प्रशासन में तत्कालीन भारतीय व्यवस्था एवं उससे हट कर नेपाल की स्वतन्त्रा प्रशासन व्यवस्था के समन्वय एवं अन्तर को स्पष्ट करते हुए तुलनात्मक अध्ययन एवं विभिन्न अधिकरणों के विषय में अध्ययन किया गया है। विभिन्न प्रकार के करों, भूमि व्यवस्था, वात्र्ता के क्षेत्रों के अध्ययन से लिच्छवियों द्वारा प्रजा के प्रति पर्याप्त सदाश्यता का परिचय मिलता है। विभिन्न जाति एवं समूह के लोगों मे धर्म संकर रोकने के लिच्छवियों के प्रयास तथा शैव परम्परा के बीजारोपण तथा लिच्छवियों द्वारा सर्व धर्म मसन्वय एवं धार्मिक सहिष्णुता को प्रश्रय देकर नेपाल में सामाजिक आर्थिक उन्नयन के कार्य जिनका प्रतिफल आज भी नेपाल की परम्पराओं में स्पष्ट है इन सारे विषयोें पर संक्षिप्त अध्ययन किया गया है।

 

डा. श्रीमती सुष्मा मणि जन्म 1953 ने प्र्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विषय में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1976 ई0 में स्नातकोत्तर परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की तथा इन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1983 मे पीएव.डी. की उपाधि मिली। विदेशी भाषाओं में आपकों नेपाली तथा तिब्बती में पर्याप्त रूचि तथा ज्ञान है। अपने पति डा. बुद्ध रश्मि मणि मे साथ इन्होंने कई पुरातात्विक अन्वेषणों एवं उत्खननों में भाग लिया। विभिन्न शोध पत्रिकाओं में इनके कई निबन्ध प्रकाशित हो चुके हैं। सम्प्रति ये नेपाल में बौद्ध धर्म के उत्कर्ष एवं विकास पर इण्डियन काॅन्सिल आॅव हिस्टाॅरिकल रिसर्च की सहायता ये शोध कार्य में संलग्न हैं।


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